દેશી હિસાબ

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भारत की साँस्कृतिक विरासत : परंपराएँ हस्तकला और ललितकलाएँ Class 10 GSEB Solutions Social Science Chapter 2

 

भारत की साँस्कृतिक विरासत : परंपराएँ हस्तकला और ललितकलाएँ Class 10 GSEB Solutions Social Science Chapter 2

GSEB Class 10 Social Science भारत की साँस्कृतिक विरासत : परंपराएँ हस्तकला और ललितकलाएँ Textbook Questions and Answers

1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए:

प्रश्न 1.
प्राचीन भारत की विरासत की मिट्टी काम कला समझाइए ।
उत्तर:
मानव और मिट्टी के बीच अधिक प्राचीन संबंध रहा है ।

ऑनलाइन आर्ट कोर्स

  • व्यक्ति के जन्म से मृत्यु तक की यात्रा मिट्टी के साथ जुड़ी है ।
  • धातु की खोज नहीं हुई थी, तब मानव अधिकतर मिट्टी की बनी सामग्री का उपयोग करता था ।
  • मिट्टी के खिलौने, घड़े, कुल्हड़, हॉडी, मिट्टी के चूले तथा अनाज संग्रह की कोठियाँ आदि बनाए जाते थे ।
  • इस समय घरों की दीवारें भी मिट्टी और गोबर से लेपन करके सुरक्षित रखी जाती थी ।
  • पानी, दूध, दही, छाछ और घी जैसे द्रव भी मिट्टी के बर्तनों में संग्रह किये जाते थे ।
  • रसोई के बर्तन भी मिट्टी के होते थे ।
  • लोथल, मोहें-जो-दडो तथा हड़प्पा संस्कृति के समय के मिट्टी की लाल रंग की प्याली, बरनी, तस्तरी आदि बर्तन मिले हैं ।
  • कुंभार का चक्र मिट्टी काम का भारत का सबसे प्राचीन और प्रथम यंत्र है ।
  • कच्ची-पक्की मिट्टी से पके (टेराकोटा) बर्तनों तथा वस्तुओं का उत्पादन करने के लिए भारत प्राचीन काल से प्रसिद्ध है ।
  • दक्षिण भारत में नागार्जुन कोंडा और गुजरात के लांघणज (मेहसाणा जिला) में प्राप्त हाथ से बने मिट्टी के बर्तनों के पुराने अवशेष मिले है ।

प्रश्न 2.
‘चर्मकाम भारत की बहुत पुरानी कारीगरी है ।’ स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर:
प्राचीन भारत में मृत्यु प्राप्त जानवरों के चमड़े के विविध उपयोग होता था ।
प्राणियों की मृत्यु के बाद परंपरागत रूप से चमड़ा की प्रक्रिया चलती थी ।

  • कृषि के लिए कुए से पानी निकालने के लिए मस्क तथा कोस और पखालों में चमड़े का उपयोग होता था ।
  • ढोल, नगाड़ा, तबला जैसे संगीत के साधनों के उपरांत लुहार की ढ़ोकनी, विविध प्रकार के जूते, प्राणियों को बाँधने के पट्टे बनते थे ।
  • युद्धों में उपयोग में आनेवाली ढ़ाल में भी चमड़े का उपयोग होता था ।
  • भारत का चर्म उद्योग में महत्त्वपूर्ण स्थान रखनेवाली चमड़े की भरत-गूंथनवाली मोजडियाँ, जूरे, चमड़े के पॉकेट, पट्टे तथा घोड़े और ऊँट जैसे प्राणियों की पीठ पर रखनेवाले साज, पलाण, लगाम तथा चाबुक की डोरी में चमड़े का उपयोग होता था ।

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प्रश्न 3.
संगीत रत्नाकर का परिचय दीजिए ।
उत्तर:
संगीतशास्त्र के विशेषज्ञ पंडित सारंगदेव ने इस ग्रन्थ की रचना की थी ।

  • दोलताबाद (देवगिरि) के निवासी होने के उपरांत उत्तर भारत और दक्षिण भारत के संगीत से परिचित थे ।
  • पंडित विष्णुनारायण भातखंड ने ‘संगीत रत्नाकर’ को भारतीय संगीत की सबसे प्रमाणिक ग्रंथ माना है ।
  • संगीत के अंगों को समझने के लिए यह ग्रन्थ बेजोड़ माना जाता है ।

प्रश्न 4.
‘कथकली’ नृत्य की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
कथकली केरल राज्य का प्रसिद्ध नृत्य है ।

  • कथकली पौराणिक महाकाव्यों, महाभारत के प्रसंगों और संस्कृत मलयालम मिश्रित नाटकों पर से कथकली कहलाता है ।
  • कथकली की वेशभूषा, घेरदार, सुंदर कपड़ोंवाली होती है और उनके पात्रों को पहचानने के लिए उनके चेहरे पर विशिष्ट मुखाकृति को समझना पड़ता है ।
  • इस नृत्य में नट कलात्मक मुकुट धारण करके प्रस्तुती के समय एक ही तेल के दिए के, उससे ही प्रकाशित रंगमंच पर पड़दे के पीछे आकर अपनी संगीतमय पहचान देकर तीनों लोगों के पात्रों के चेहरे के हावभाव और हस्तमुद्रा से सजीव करते है ।
  • केरलियन कवि श्री बल्लथोल, कलामंडलम्, कृष्णप्रसाद आदि ने इस शैली को देश-विदेशों में पहचान दी है ।

2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर मुद्दासर दीजिए:

प्रश्न 1.
नृत्यकला के क्षेत्र में भारत द्वारा की गयी प्रगति बताइए ।
उत्तर:
नृत्य शब्द की व्युत्पत्ति मूल संस्कृत शब्द नृत से हुई है ।

  • नृत्य ताल और लय के साथ सौंदर्य की अनुभूति कराता है ।
  • नृत्य कला के आदि देव भगवान शिव नटराज माने जाते है ।
  • ऐसा माना जाता है कि नटराज पृथ्वीवासियों को नृत्यकला सिखाने के लिए स्वर्ग से पृथ्वी पर इस कला को सर्वप्रथम लाये थे ।
  • भारतीय नृत्य के दो प्रकार है: (1) लोक नृत्य (2) शास्त्रीय नृत्य
  • भारतीय शास्त्रीय नृत्य के मुख्य प्रकार (1) भरतनाट्यम् (तमिलनाडु), (2) कुचीपुड़ी – आंध्रप्रदेश (3) कथकली – केरल (4) कथक नृत्य – उत्तर भारत (5) मणिपुरी – मणिपुर और (6) ओड़िसी – उड़ीसा का है ।
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प्रश्न 2.
गुजरात के गरबा और गरबी की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
गरबा शब्द ‘गर्भ-दीप से आया है । घड़े को रंग कर उस पर द्वीप रखकर, उसे सिर पर रखकर गोलाकार नृत्य करना गरबा है ।

  • समग्र गुजरात राज्य में गरबा नवरात्रि-आसो सुद 1 से आसो सुद नवमी दरम्यान खेला जाता है ।
  • आद्यपा शक्ति माँ जगदंबा की पूजा और आराधना इस पवित्र पर्व गवरी गुजबी, माताजी के गरबे गाते है ।
  • सामान्य रूप से चौक या मैदान के बीच माताजी की मांडवी होती है और उसके घूमते गोलाकार बड़े भाग में तालियों के ताल और ढ़ोल के धबकारों के साथ गरबे होते है ।
  • सामान्य रूप से गरबा में गानेवाले, गरबा करनेवाले और ढ़ोल के ताल गीत, स्वर और ताल प्राप्त करके दो ताली, तीन ताली और चिपटी के साथ, हाथ के हिलोरों के साथ गरबा गाया जाता है ।
  • गुजरात में गरबा के उपरांत गायी जानेवाली गरबियों का संबंध कृष्ण भक्ति के साथ है ।
  • गुजराती कवि दयाराम ने गोपी के भाव से श्रीकृष्ण प्रेम की रंगभरी गरबियों की रचना कर गुजराती महिलाओं के कण्ठों गुंजती कर दी ।

प्रश्न 3.
भारत के और गुजरात के हीरा-मोती काम और मीनाकारी काम की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
भारत में समुद्री किनारा लम्बा होने से प्राचीनकाल से ही हीरा-मोती का व्यापार होता है ।

  • भारत के कारीगरों द्वारा बने हीरे-मोती के आभूषणों की प्राचीन काल से ही खूब माँग रही है ।
  • विश्व विख्यात कोहिनूर और ग्रेट मुघल हीरा भी भारत में मिले थे ।
  • भारत के लोग आभूषणों के शौकीन होने से आभूषणों के अलावा श्रीमंत वर्ग, राजा-महाराजा और अमीर विविध हीरामोती के आभूषणों का उपयोग करते थे ।
  • आभूषणों में हीरा-मोती, माणेक, पन्ना, पुखराज, नीलम आदि रत्नों का उपयोग होता था ।
  • गुजरात में मोती काम का विशेष उपयोग होता था ।
  • मोती के कलात्मक तोरण, मालाएँ, कलश, धरूँ, खिड़कियाँ, चौकी, विवाह के नारियल, ईढाणी, पंखे, बैल के सुशोभन के मोडिया, सींग के झालर बनाए जाते थे ।
  • विश्वभर में सोना-चाँदी, मीनाकारी, कला-कारीगरों में भारत अग्रिम स्थान पर है ।
  • मीनाकारी में लाल, हरा और आसमानी रंग के पत्थरों का उपयोग होता था ।
  • ऐसी मीनाकारी के कौशल्यवाले कारीगर जयपुर, लखनऊ, दिल्ली, वाराणसी और हैदराबाद में विशेष पाये जाते है ।

प्रश्न 4.
गुजरात में आदिवासियों के नृत्यों की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
गुजरात में आदिवासियों में होली और दूसरे त्यौहारों, विवाह, देवी-देवताओं को खुश करने के लिए और मेलों में नृत्य किया जाता है ।

  • अधिकांश विवाह के नृत्य गोल-गोल घूमते, ढोल और परंपरागत मंजीरा, थापी, तूर, पावरी, तंबूरा आदि स्थानिय बोले में गायन के साथ उपयोग होते है ।
  • ऐसे नृत्यों में ‘चालो’ के रूप में प्रसिद्ध नृत्य में मोर, गिलहरी, चिड़िया जैसे पक्षियों की नकल की जाती है ।
  • डाँग में ‘माली की चाली’ तथा ‘ठाकर्या चालो’ नृत्य पाये जाते है ।
  • जबकि भील और कोली जातियों में श्रमहारी टिप्पणी नृत्य में मोटी लकड़ी के नीचे लकड़ी के टुकड़ों पर जमीन पर मारकर ताल द्वारा समूह नृत्य किये जाते है ।

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3. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त में दीजिए:

प्रश्न 1.
‘संगीत रत्नाकर’ और ‘संगीत पारिजात’ ग्रन्थों की रचना करनेवाले पंडितों के नाम लिखिए ।
उत्तर:

  1. संगीत रत्नाकर की रचना पंडित सारंगदेव ने की थी ।
  2. संगीत पारिजात की रचना पंडित अहोबल की थी ।

प्रश्न 2.
कताई कला में कौन-सी प्रक्रिया की जाती है ?
उत्तर:
कपास की पूणी से तार खेंचने के साथ उसे मोड़ देकर एक-दूसरे की पकड़ में जोड़कर लम्बे धागे तैयार करने की कला को कताई कला कहते हैं ।
महात्मा गाँधी ने बुनाई कला को गृह उद्योग में महत्त्व देकर स्वतंत्रता आंदोलन में स्वदेशी और स्वावलंबन के साथ जोड़ा था ।

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प्रश्न 3.
लोथल के कारीगर धातु से क्या-क्या बनाना जानते थे ?
उत्तर:
लोथल के कारीगर धातुओं से दाँतरा, आरी, सूई, शारडिया, मोड़दार करवत जैसे ताँबे और कांसे के औजार बनाना जानते थे ।

  • इन औजारों के उपरांत बर्तन, मूर्तियाँ, पात्र बनाए जाते थे ।
  • युद्ध के लिए धातु के शस्त्र बनाते थे । गेहने बनाते थे ।
  • ताँबा, पीतल, काँसा जैसी धातुओं का उपयोग बर्तन और मूर्तियाँ तथा लोहे का उपयोग हथियार बनाने में करते थे ।

प्रश्न 4.
हड़प्पा के लोग मिट्टी के बर्तनों पर कौन-कौन सी भात बनाते थे ?
उत्तर:
हड़प्पा के लोग मिट्टी के बर्तनों पर फूल के पौधों और भौमितिक रेखांकन की भात चढ़ाते थे । मध्यप्रदेश के हाथी, गेंडा, हिरण इत्यादि के चित्र उल्लेखनीय है ।

प्रश्न 5.
भवाई की संक्षिप्त में जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
विद्वानों ने भवाई को भावप्रधान नाटक कहा है ।

  • भवाई नाटक असाइत ठाकर द्वारा शुरू की गयी गुजरात की लगभग 700 वर्ष पुरानी विशिष्ट कला है ।
  • कम खर्च में लोकशिक्षण के साथ मनोरंजन की इस कला को सोलंकी युग में प्रोत्साहन मिला था ।
  • अधिकांश पर्दे बिना होनेवाले नाटकों, हलकी शैली और मुंगल वाद्य संगीत प्रधान नाटकों और वेश भवाई की विशेषता रही है ।
  • भवाई की विषयवस्तु में सामाजिक कुरीतियों का प्रतिकार भी है ।
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4. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर दीजिए:

प्रश्न 1.
निम्न में से कौन-सी कृति कालिदास की है ?
(A) ऊरूभंग
(B) कर्णभार
(C) मेघदूतम्
(D) दूतवाक्यम्
उत्तर:
(C) मेघदूतम्

प्रश्न 2.
वैजयंतीमाला और हेमामालिनी किस नृत्यशैली के साथ संलग्न है ?
(A) मणिपुरी नृत्यशैली
(B) कुचीपुड़ी नृत्यशैली
(C) कथकली नृत्यशैली
(D) भरतनाट्यम् नृत्यशैली
उत्तर:
(D) भरतनाट्यम् नृत्यशैली

प्रश्न 3.
भारत का कौन-सा वेद संगीतकला से जुड़ा माना जाता है ?
(A) ऋग्वेद
(B) सामवेद
(C) यजुर्वेद
(D) अथर्ववेद
उत्तर:
(B) सामवेद

प्रश्न 4.
भारत में संगीत के क्षेत्र में ‘तुती-ए-हिन्द’ के रूप में कौन प्रसिद्ध है ?
(A) तानसेन
(B) तुलसीदास
(C) कबीर
(D) अमीर खुशरों
उत्तर:
(D) अमीर खुशरों

प्रश्न 5.
‘चालो’ नृत्य अर्थात् कौन-सा नृत्य ?
(A) आदिवासी नृत्य
(B) भरवाड़ों का नृत्य
(C) कोलियों का नृत्य
(D) पढ़ारों का नृत्य
उत्तर:
(A) आदिवासी नृत्य

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प्रश्न 6.
धमाल नृत्य करनेवाले सीदी मूलत: कहाँ के निवासी है ?
(A) राजस्थान
(B) अंदमान
(C) अफ्रिका
(D) थाइलैण्ड
उत्तर:
(C) अफ्रिका

प्रश्न 7.
विश्व योग दिवस किस तारीख को मनाया जाता है ?
(A) 21 जून
(B) 1 मई
(C) 21 अप्रैल
(D) 5 सितम्बर
उत्तर:
(A) 21 जून

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर सही विकल्प चुनकर दीजिए:

प्रश्न 1.
भारत का प्रथम यंत्र कौन-सा है ?
(A) चक्र
(B) कुलहाड़ी
(C) कैंची
(D) घोडागाड़ी
उत्तर:
(A) चक्र

प्रश्न 2.
संगीत रत्नाकर ……………………… ने लिखी थी ।
(A) पंडित अहोबल
(B) पं. नारद
(C) पं. सारंगदेव
(D) बैजू बावरा
उत्तर:
(C) पं. सारंगदेव

प्रश्न 3.
कथकली नृत्य का संबंध किस राज्य से है ?
(A) केरल
(B) कर्णाटक
(C) तमिलनाडु
(D) आंध्र प्रदेश
उत्तर:
(A) केरल

प्रश्न 4.
गरबियों को कृष्ण भक्ति के साथ किसने जोड़ा है ?
(A) मीराबाई
(B) नरसिंह मेहता
(C) अखा
(D) दयाराम
उत्तर:
(D) दयाराम

प्रश्न 5.
‘देवासुर संग्राम’ ग्रन्थ किसने लिखा है ?
(A) भरत मुनि
(B) कालिदास
(C) भास
(D) भारवी
उत्तर:
(A) भरत मुनि

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प्रश्न 6.
‘नाट्य शास्त्र’ की रचना किसने की थी ?
(A) भरतमुनि
(B) कालिदास
(C) भास
(D) भारवी
उत्तर:
(A) भरतमुनि

प्रश्न 7.
इनमें से कौन-सी कृति महाकवि भास की महाभारत पर आधारित नहीं है ?
(A) कर्णभार
(B) उरुभंग
(C) दूतवाक्यम्
(D) अभिज्ञान शाकुंतलम्
उत्तर:
(D) अभिज्ञान शाकुंतलम्

प्रश्न 8.
कालिदास का सबसे प्रसिद्ध नाटक कौन-सा है ?
(A) देवासुर संग्राम
(B) कर्णभार
(C) उरुभंग
(D) अभिज्ञान शाकुंतलम्
उत्तर:
(D) अभिज्ञान शाकुंतलम्

प्रश्न 9.
मणिपुरी नृत्य में पहने जानेवाले हरे रंग के घाघरे को क्या कहते हैं ?
(A) जुमान
(B) कुमान
(C) दमान
(D) कर्णभार
उत्तर:
(B) कुमान

प्रश्न 10.
नृत्य के देवाधिदेव कौन माने जाते है ?
(A) विष्णु
(B) नटराज
(C) ब्रह्माजी
(D) गणेश जी
उत्तर:
(B) नटराज

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प्रश्न 11.
संगीत मकरंद की रचना कब की गयी थी ?
(A) ई.स. पूर्व 900
(B) ई.स. 900
(C) ई.स. 1665
(D) ई.स. 1005
उत्तर:
(B) ई.स. 900

प्रश्न 12.
संगीत रत्नाकर किसने लिखा था ?
(A) पं. नारद
(B) पं. सारंगदेव
(C) पं. अहोबल
(D) तानसेन
उत्तर:
(B) पं. सारंगदेव

प्रश्न 13.
संगीत मकरंद में कितने प्रकार की विणा का वर्णन है ?
(A) 9
(B) 10
(C) 19
(D) 29
उत्तर:
(C) 19

प्रश्न 14.
संगीत मकरंद में कितने प्रकार के ताल का वर्णन है ?
(A) 19
(B) 61
(C) 101
(D) 129
उत्तर:
(C) 101

प्रश्न 15.
संगीत पारिजात ग्रन्थ की रचना कब हुई थी ?
(A) ई.स. 900
(B) ई.स. 1665
(C) ई.स. 1770
(D) ई.स. 1210 में
उत्तर:
(B) ई.स. 1665

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प्रश्न 16.
संगीत पारिजात की रचना किसने की थी ?
(A) पं. सारंगदेव
(B) पं. नारद
(C) पं. अहोबल
(D) तानसेन
उत्तर:
(C) पं. अहोबल

प्रश्न 17.
संगीत मकरंद में कितने प्रकार के स्वरों का वर्णन है ?
(A) 9
(B) 19
(C) 29
(D) 101
उत्तर:
(C) 29

प्रश्न 18.
जरीकाम के लिए गुजरात का कौन-सा शहर प्रसिद्ध है ?
(A) अहमदाबाद
(B) सुरत
(C) बड़ोदरा
(D) जामनगर
उत्तर:
(C) बड़ोदरा

प्रश्न 19.
भवाई नृत्य कितने वर्ष पुराना है ?
(A) 500
(B) 700
(C) 850
(D) 900
उत्तर:
(B) 700

प्रश्न 20.
पढार नृत्य किस जिले का प्रसिद्ध है ?
(A) आणंद
(B) बड़ोदरा
(C) सुरत
(D) सुरेन्द्रनगर
उत्तर:
(D) सुरेन्द्रनगर

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प्रश्न 21.
‘भरतनाट्यम्’ नृत्य किस स्थान से संबंधित है ?
(A) चैन्नई
(B) तांजोर
(C) जयपुर
(D) तूतीकोरम
उत्तर:
(B) तांजोर

प्रश्न 22.
इनमें से किसका संबंध भरतनाट्यम् से है ?
(A) हेमामालिनी
(B) वैजयंतिमाला
(C) गोपीकृष्ण
(D) ये तीनों ही
उत्तर:
(D) ये तीनों ही

प्रश्न 23.
कुचीपुड़ी की रचना किस सदी में हुई थी ?
(A) 14वीं
(B) 15वीं
(C) 16वीं
(D) 17वीं
उत्तर:
(B) 15वीं

प्रश्न 24.
कुचीपुड़ी नृत्य का संबंध किस राज्य से है ?
(A) आंध्रप्रदेश
(B) तमिलनाडु
(C) केरल
(D) हैदराबाद
उत्तर:
(A) आंध्रप्रदेश

प्रश्न 25.
राजस्थान का कौन-सा शहर जड़ाऊ कला के लिए प्रसिद्ध है ?
(A) अजमेर
(B) बिकानेर
(C) कोटा
(D) जोधपुर
उत्तर:
(B) बिकानेर

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प्रश्न 26.
गुजरात में अकीक कहाँ से प्राप्त होता है ?
(A) अहमदाबाद
(B) सुरत
(C) खंभात
(D) ये तीनों ही
उत्तर:
(A) अहमदाबाद

प्रश्न 27.
गुजरात का कौन-सा स्थान अकीक काम के लिए प्रसिद्ध है ?
(A) खंभात
(B) राणपुर
(C) सुरत
(D) बड़ोदरा
उत्तर:
(A) खंभात

प्रश्न 28.
वेद कितने है ?
(A) 4
(B) 3
(C) 5
(D) 6
उत्तर:
(A) 4

प्रश्न 29.
भारतीय संगीत में कितने स्वर होते है ?
(A) 5
(B) 6
(C) 7
(D) 9
उत्तर:
(C) 7

प्रश्न 30.
भारतीय संगीत के कितने राग है ?
(A) 5
(B) 6
(C) 7
(D) 9
उत्तर:
(A) 5

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प्रश्न 31.
कौन-सा ग्रंथ संगीत के अंगों को समझने का बेजोड़ ग्रन्थ है ?
(A) संगीत मकरंद
(B) संगीत रत्नाकर
(C) संगीत पारिजात
(D) संगीत सरीता
उत्तर:
(B) संगीत रत्नाकर

प्रश्न 32.
भरत में …………….. कलाएँ प्रचलित है ।
(A) 64
(B) 46
(C) 56
(D) 101
उत्तर:
(A) 64

प्रश्न 33.
बाँधनी वस्त्र परिधान का संबंध किस राज्य से है ?
(A) आंध्र प्रदेश
(B) बिहार
(C) गुजरात
(D) राजस्थान
उत्तर:
(D) राजस्थान

प्रश्न 34.
प्राचीन भारत का कौन-सा नगर मलमल के लिए प्रसिद्ध था ?
(A) करांची
(B) जयपुर
(C) ढाका
(D) मदुराई
उत्तर:
(C) ढाका

प्रश्न 35.
पाटोला की कला कितने वर्ष पुरानी है ?
(A) 800
(B) 500
(C) 850
(D) 675
उत्तर:
(C) 850

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प्रश्न 36.
भरत कार्य के लिए गुजरात की कौन-सी जाति सुप्रसिद्ध है ?
(A) बन्नी
(B) जत
(C) कत
(D) नट
उत्तर:
(B) जत

प्रश्न 37.
भरत कार्य के लिए गुजरात का कौन-सा क्षेत्र प्रसिद्ध है ?
(A) कानम
(B) चरोतर
(C) जत
(D) बन्नी
उत्तर:
(D) बन्नी

प्रश्न 38.
गुजरात के कौन-से स्थान बांधनी कार्य के लिए प्रसिद्ध है ?
(A) जामनगर और जेतपुर
(B) भुज और मांडवी
(C) भुज और राजकोट
(D) B और C
उत्तर:
(D) B और C

उचित शब्दों द्वारा रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए:

1. मानव और ……………… के बीच अधिक प्राचीन संबंध है ।
उत्तर:
(मिट्टी)

2. प्राचीन नगर लांघणज ……………………………… जिले में है ।
उत्तर:
(मेहसाणा)

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3. संगीत के अंगों को समझने का बेजोड़ ग्रन्थ ………………………….. को माना जाता है ।
उत्तर:
(संगीत रत्नाकर)

4. पंडित सारंगदेव ……………………… के रहनेवाले थे ।
उत्तर:
(दोलताबाद)

5. ………………………… का प्रभाव बढ़ने से रास अधिक लोकप्रिय बना है ।
उत्तर:
(वैष्णव संप्रदाय)

6. ………………………… ने नाट्यशास्त्र की रचना की थी ।
उत्तर:
(भरत मनि)

7. भवाई नृत्य ……………………. द्वारा शुरू किया गया था ।
उत्तर:
(अताई ठाकर)

8. भवाई नृत्य को ………………………….. युग में प्रोत्साहन मिला था ।
उत्तर:
(सोलंकी)

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9. मेरायो के नृत्य में ………………………….. और ……………………….. घाँस के तोरण बनते है ।
उत्तर:
(सरखड़, झुंझाली)

10. अभिनव दर्पण ………………………. ने लिखा था ।
उत्तर:
(नंदीकेश्वर)

11. ……………………. नृत्य में भारतीय मुद्राएँ की जाती है ।
उत्तर:
(कुचीपुड़ी)

12. हड़प्पीय संस्कृति के अवशेषों में ………………………… वर्ष पुराने चित्र प्राप्त हुए है ।
उत्तर:
(5000)

13. …………………………. वेद को संगीत की गंगोत्री माना जाता है ।
उत्तर:
(साम)

14. संगीत में …………………….. और …………………… का समावेश होता है ।
उत्तर:
(गायन, वादन)

15. ……………………. ने संगीत रत्नाकर को संगीत का बेजोड़ ग्रन्थ माना है ।
उत्तर:
(पं. विष्णुनारायण भातखंड)

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16. बालक को माता-पिता द्वारा प्राप्त शारीरिक लक्षण ……………….. विरासत कहते हैं ।
उत्तर:
(जैविक)

17. समग्र भारत में 21 जून को …………………….. दिवस मनाया जाता है ।
उत्तर:
(विश्व योग)

18. भाटोल की कला का ……………………… युग स्वर्ण युग था ।
उत्तर:
(सोलंकी)

19. गुजरात के …………………….. के बन्नी प्रदेश की जत जाति भरत कला के लिए प्रसिद्ध है ।
उत्तर:
(कच्छ)

निम्नलिखित शब्द समझाइए:

1. टेराकोटा – कच्ची मिट्टी से पके हुए बर्तनों को टेराकोटा कहा जाता है ।
2. मशक – प्राचीन समय में कुए से पानी निकालने की चमड़े से बनी वस्तु ।
3. गरबा – गरबा शब्द ‘गर्भ दीप’ से बना है जिसमें घड़े को रंगकर, दिया रखकर, उसे सिर पर रखकर गोलाकार नृत्य करना गरबा है ।
4. रास – रास अर्थात् गोलाकार घूमते हुए गायन के साथ नृत्य करना ।
5. नाट्यशास्त्र/नाट्य – मनोरंजन के साथ जीवन के प्रसंगों का चित्रण करना नाट्यशास्त्र कहलाता है ।
6. नृत्य – ताल और लय के साथ सौंदर्य की अनुभूति के माध्यम को नृत्य कहते हैं ।
7. कताई – कला – कपास की पैनी के तार खेंचकर उसे मोड़ देकर एक-दूसरे की पकड़ में जोड़कर लम्बा धागा तैयार करने की कला को कताई कहते हैं ।
8. मेरायो नृत्य – बनासकांठा के वाव क्षेत्र में घास की तौरण जैसे झूमर बाँधकर ढ़ोल की आवाज के साथ तलवार के दाव-पेच द्वारा जो नृत्य किया जाता है, उसे मेरायो नृत्य कहते हैं ।
9. अकीक – नदियों के किनारे पर पाया जानेवाला कार्नेलियम पत्थर जो सिलिका मिश्रित – भूरे और सफेद रंग का (केल्सिडोनिक) चमकदार पत्थर होता है ।
10. चित्रकला – रंग और रेखाओं के माध्यम से प्रकृति के जड़ और चेतन तत्त्वों का अनुसरण करके कलाकार के मन के भाव व्यक्त करने की कला चित्रकला है ।
11. सांस्कृतिक विरासत – मनुष्य अपनी योग्यता, बुद्धिशक्ति, कला, कौशल्य द्वारा जो कुछ प्राप्त किया है, सर्जन किया है उसे सांस्कृतिक विरासत कहते हैं ।
12. पाटोला – पाटोला पाटण का एक प्रसिद्ध रेशमी वस्त्र परिधान है जिसे दोनों तरफ पहना जाता है ।

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नीचे दिए गये विभाग ‘A’ से विभाग ‘B’ के साथ सही क्रम से जोडिए: 

1.

विभाग-Aविभाग-B
1. संगीत मकरंद1. अमीर खुशरो
2. संगीत रत्नाकर2. पंडित अहोबल
3 संगीत पारिजात3. पंडित सारंगदेव
4. तूती-ए-हिन्द4. पंडित नारद
5. नाट्यशास्त्र5. भरतमुनि

उत्तर:

विभाग-Aविभाग-B
1. संगीत मकरंद4. पंडित नारद
2. संगीत रत्नाकर3. पंडित सारंगदेव
3 संगीत पारिजात2. पंडित अहोबल
4. तूती-ए-हिन्द1. अमीर खुशरो
5. नाट्यशास्त्र5. भरतमुनि

2.

विभाग-Aविभाग-B
1. कांजीवरम1. पाटोला
2. बांधनी2. ढाका
3. मलमल3. राजस्थान
4. पाटण4. साडी
5. कश्मीर5. गलीचा

उत्तर:

विभाग-Aविभाग-B
1. कांजीवरम4. साडी
2. बांधनी3. राजस्थान
3. मलमल2. ढाका
4. पाटण1. पाटोला
5. कश्मीर5. गलीचा

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3.

विभाग-Aविभाग-B
1. भरतनाट्यम् नृत्य1. तमिलनाडु
2. कुचीपुड़ी नृत्य2. आंध्र प्रदेश
3. कथकली नृत्य3. केरल
4. मणिपुरी नृत्य4. मणिपुर

उत्तर:

विभाग-Aविभाग-B
1. भरतनाट्यम् नृत्य1. तमिलनाडु
2. कुचीपुड़ी नृत्य2. आंध्र प्रदेश
3. कथकली नृत्य3. केरल
4. मणिपुरी नृत्य4. मणिपुर

4.

विभाग-Aविभाग-B
1. गरबा1. कालिदास
2. भावप्रधान नाटक2. भरतमुनि
3. देवासुर संग्राम3. भवाई
4. विक्रमोवीयम्4. गरबा

उत्तर:

विभाग-Aविभाग-B
1. गरबा4. गरबा
2. भावप्रधान नाटक3. भवाई
3. देवासुर संग्राम2. भरतमुनि
4. विक्रमोवीयम्1. कालिदास

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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो वाक्यों में दीजिए:

प्रश्न 1.
प्राचीन समय में मिट्टी से कौन-कौन सी वस्तुएँ बनती थी ?
उत्तर:
प्राचीन समय में मिट्टी से खिलौने, घड़े, कुल्हड़, हाँडी, दिए, चूल्हे तथा अनाज संग्रह की कोठियाँ बनती थी ।

प्रश्न 2.
भारत में प्राचीन काल की मिट्टी की वस्तुओं के अवशेष कहाँ से प्राप्त हुए है ?
उत्तर:
लोथल, मोहे-जो-दड़ो तथा हड़प्पा संस्कृति से मिट्टी की वस्तुओं के अवशेष प्राप्त हुए है ।

प्रश्न 3.
हाथ से बने मिट्टी के प्राचीन बर्तनों के अवशेष कहाँ से प्राप्त हुए है ?
उत्तर:
दक्षिण भारत में नागार्जुन कोड और गुजरात के लाँघणज से प्राप्त हुए है ।

प्रश्न 4.
प्राचीन समय में चमड़े से बनी पानी के उपयोग की दो वस्तुओं के नाम लिखिए ।
उत्तर:
प्राचीन समय में कुएँ से पानी निकालने के लिए मशक और पानी ले जाने के लिए चमड़े की पखाल का उपयोग होता था ।

प्रश्न 5.
कथकली को किन लोगों ने देश-विदेशों में पहचान दी है ?
उत्तर:
श्री वल्लथोल, कलमंडलम, कृष्ण प्रसाद और शिवारमन् आदि ने कथकली को पहचान दी है ।

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प्रश्न 6.
कथकली का नाम किसके पीछे पड़ा है ?
उत्तर:
कथकली शब्द पौराणिक महाकाव्यों, महाभारत के प्रसंगों और संस्कृत मलयालम मिश्रित नाटकों पर पड़ा है ।

प्रश्न 7.
रास नृत्य में कैसे वस्त्र पहने जाते है ?
उत्तर:
रास खेलते समय स्त्रियाँ भरतगुंथन से भरे चणिया-चोली और पुरुष केडिया-धोती के परंपरागत पोशाक पहनते है ।

प्रश्न 8.
गुजराती नाट्यकला में किन लोगों ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है ?
उत्तर:
जयशंकर सुंदरी, अमृत नायक, बापुलाल नायक, प्राणसुख नायक, दिना पाठक, जशवंत ठाकर, उपेन्द्र त्रिवेदी, प्रवीण जोषी, सरिता जोषी, दीपक घीवाला आदि ।

प्रश्न 9.
भास की महाभारत पर आधारित कृतियाँ कौन-कौन सी है ?
उत्तर:
कर्णभार, उरूभंग और दूतवाक्यम् महाभारत पर आधारित है ।

प्रश्न 10.
मणिपुरी नृत्य के प्रसिद्ध नृत्यकार कौन-कौन है ?
उत्तर:
आमोबीसिंग आतोम्बोसिंग, गुरु विपिन सिन्हा, नयना झवेरी, निर्मल मेहता आदि ।

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प्रश्न 11.
भवाई नृत्य में कौन-से वेश धारण किये जाते है ?
उत्तर:
भवाई नृत्य में रामदेव, झंडा झूलने का वेश, कुजोड़ा का वेश धारण किया जाता है ।

प्रश्न 12.
भवाई नृत्य की क्या विशेषता है ?
उत्तर:
कम खर्च के साथ लोकशिक्षण और मनोरंजन करना है ।

प्रश्न 13.
डाँग के कौन से आदिवासी नृत्य की शैलियाँ प्रचलित है ?
उत्तर:
‘माली का चालो’ और ‘ठाकर्या चालो’ नृत्य डांग में प्रसिद्ध है ।

प्रश्न 14.
कथक नृत्य के मुख्य नृत्यकार कौन-कौन है ?
उत्तर:
पंडित श्री बिरजू महाराज, सितारादेवी और कुमुदिनी लाखिया आदि ।

प्रश्न 15.
भरतनाट्यम् से संबंधी कौन-कौन से ग्रन्थ है ?
उत्तर:
भरत मुनि रचित ‘नाट्यशास्त्र’ और नंदीकेश्वर रचित ‘अभिनवदर्पण’ भरतनाट्यम् पर आधारित है ।

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प्रश्न 16.
भरतनाट्यम् के मुख्य नृत्यकार कौन-कौन है ?
उत्तर:
अभिनेत्रियाँ हेमामालिनी और वैजयंतिमाला मुख्य नृत्यकार है ।

प्रश्न 17.
कुचीपुड़ी नृत्य के मुख्य नृत्यकार कौन-कौन है ?
उत्तर:
गुरु प्रहलाद शर्मा, राजा रेड्डी, यामिनी रेड्डी, शोभा नायडु आदि कुचीपुड़ी के मुख्य नृत्यकार है ।

प्रश्न 18.
गुजरात में अकीक कहाँ पाया जाता है ?
उत्तर:
गुजरात में अहमदाबाद, सुरत, खंभात और राणपुर क्षेत्रों में अकीक प्राप्त होता है ।

प्रश्न 19.
भारतीय संगीत विश्व में किस दृष्टि से अलग है ?
उत्तर:
भारतीय संगीत विश्व में ताल, लय और स्वरों की दृष्टि से अलग है ।

प्रश्न 20.
भारतीय संगीत के कौन-से पाँच राग है ?
उत्तर:
भारतीय संगीत के पाँच राग (1) श्री (2) दीपक (3) हिंडोल (4) मेध और (5) भैरवी है ।

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प्रश्न 21.
सांस्कृतिक विरासत किसे कहते हैं ?
उत्तर:
मनुष्य ने अपनी बुद्धि, योग्यता, कला, ज्ञान, कौशल्यता से जो कुछ विकसित किया है और सर्जित किया है उसे सांस्कृतिक विरासत कहते हैं ।

प्रश्न 22.
प्राचीन भारत की चौसट कलाओं में अग्रिम कलाएँ कौन-सी है ?
उत्तर:
प्राचीन भारत की चौसठ कलाओं में हस्तकला, कारीगरी, हुन्नर, चित्र, संगीत, नाट्य और नृत्य श्रेष्ठ मानी जाती है ।

प्रश्न 23.
प्राचीन भारत के कौन-कौन से वस्त्र प्रसिद्ध थे ?
उत्तर:
प्राचीन भारत में राजस्थान की बांधनी, पाटण का पाटोला, कांजीवरम की साड़िया और कश्मीर के हस्तकला के गलीचे प्रसिद्ध थे ।

प्रश्न 24.
ढाका के मलमल की क्या विशेषता थी ?
उत्तर:
ढाका की मलमल का ताका माचिस की डिब्बी में समा जाता था और साड़ी अंगूठी से गुजर जाती थी ।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर संक्षिप्त में दीजिए:

प्रश्न 1.
संगीत मकरंद का वर्णन कीजिए ।
उत्तर:
संगीतशास्त्र के ज्ञाता पंडित नारद ने ई.स. 900 के समय दरम्यान की थी ।

  • इस ग्रन्थ में 19 प्रकार की वीणा और 101 प्रकार के ताल का वर्णन है ।

प्रश्न 2.
संगीत पारिजात की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
ई.स. 1665 में पं. अहोबल ने उत्तरी हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति के लिए खूब ही महत्त्वपूर्ण ग्रन्थ की रचना की थी ।

  • उन्होंने प्रत्येक राग अन्य राग से होने और उसका स्वतंत्र अस्तित्व होने की जानकारी दी थी ।
  • इसमें 29 प्रकार के स्वरों का वर्णन है ।

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प्रश्न 3.
भारत के जरीकाम के विकास की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
जरीकला भारत में प्राचीन समय से पायी जाती है ।

  • चाँदी और सोने के तार के रूप में बनाकर उसका उपयोग भरत, बुनाई, कला द्वारा कीमती वस्त्रों को सजाया जाता था ।
  • भारत में जरीकाम के हुन्नर के लिए सुरत शहर प्रसिद्ध है ।
  • साड़ी, बैस, सूट, विवाह के वस्त्रों में जरी की किनारी लगाने के लिए सूरत के कारीगर प्रसिद्ध है

प्रश्न 4.
कथक नृत्य की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
‘कथन करे सो कथक कहावे’ वाक्य पर से कथक शब्द बना है ।

  • महाभारत में श्रीकृष्ण और गोपियों के साथ नृत्यों की कला पर आधारित कथक नृत्य को वैष्णव संप्रदाय की शृंगार भक्ति के साथ उत्तर भारत में विकास हुआ था ।
  • इसमें पैर पर गोल-गोल घूमना और नृत्य के प्रसंगों को प्रदर्शित किया जाता है ।
  • नृत्य में स्त्रियाँ चुड़ीदार पायजामा और ऊपर घेरदार वस्त्र पहनते है ।
  • पंडित श्री बिरजु महाराज, सितारा देवी और कुमुदिनी लाखिया ने इस कला को जीवंत रखा है ।।

प्रश्न 5.
कुचीपुड़ी नृत्य की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
इस नृत्य का विकास 15वी सदी में हुआ था ।

  • मुख्यतः स्त्री सौंदर्य के वर्णन पर आधारित और स्त्रियों और पुरुषों दोनों द्वारा किया जानेवाला नृत्य में भारतीय नृत्य की मुद्राएँ बनायी जाती है ।
  • इस नृत्य का संबंध आंध्र प्रदेश से है । गुरु प्रहलाद शर्मा, राजा रेड्डी, शोभा नायडु, यामिनी रेड्डी इसके प्रसिद्ध नृत्यकार है ।

प्रश्न 6.
भारत की जड़ाऊ कला के विकास की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
जड़ाऊ कला भारत की एक प्राचीन कला है ।

  • भारत में राजा-महाराजा, सम्राट, अन्य शासक और उस समय के श्रीमंत आदि जो स्वर्ण अलंकार धारण करते थे उसमें हीरे, मोती, माणेक जैसे कीमती रत्न जड़वाते थे ।
  • गले का हार, बाजुबंद, कड़े, मुकट, अंगूठी, नथ आदि में रत्न जड़वाते है ।
  • विशेष निपुणता धारण करनेवाले कारीगर इस कला में निपुण थे ।
  • राजस्थान का बीकानेर जड़ाऊ कला के लिए प्रसिद्ध है ।

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प्रश्न 7.
पाटोला की कला की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
पाटण में बननेवाला पाटोला एक विशेष प्रकार का परिधान है ।

  • पाटोला की कला 850 वर्ष पुरानी है ।
  • यह रेशमी वस्त्र है जिसे दोनों तरफ से पहना जाता है ।
  • पाटोला वर्षों तक चलता है, उसका रंग नहीं जाता है और यह फटता नहीं है ।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर मुद्दासर दीजिए:

प्रश्न 1.
भारत की चित्रकला के विकास की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
सभी कलाओं में श्रेष्ठ चित्रकला मानी जाती है ।

  • रंग और रेखाओं के माध्यम से कला और सौन्दर्य का रसपान कराती चित्रकला में प्रकृति के जड़ और चेतन स्वरूपों में रहे विविध भावों का दर्शन कराने की क्षमता है ।
  • लगभग 5000 वर्ष पुरानी हड़प्पीय संस्कृति के अवशेषों में से भारतीय चित्रकला के सबूत मिले है ।
  • पुरातत्त्व विभाग द्वारा समय-समय पर होनेवाले उत्खननों में भी भारतीय चित्रकला के नमूने मिले है ।
  • पाषाणयुग के आदिवासी चित्रों के गुफा चित्रों में पशु-पक्षियों का आलेखन है ।
  • हड़प्पा के लोग मिट्टी के बर्तनों पर फूल-पौधों और भौमितिक आलेखन करते थे ।
  • मध्यप्रदेश में हाथी, गेन्डे, हिरण इत्यादि के चित्र प्राप्त हुए है । अजंता-इलोरा की गुफाओं के चित्र भारतीय कला के बेजोड़ नमूने है ।
  • भारत में पारंपरिक रूप से शुभ अवसरों पर स्वास्तिक, कलश, गणेश के चित्र और रंगोलियाँ बनाई जाती थी ।

प्रश्न 2.
भारत की काष्ठकला की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
मानव का शुरुआत से ही वृक्षों और वन्य जीवों के साथ संबंध रहा है ।

  • पहले ईंधन और मकान बनाने में ।
  • कड़ी से मूर्तियाँ, बालकों के खिलौने, खिड़की, दरवाजे, चारपाई, चौकी, झूले, अलमारी, सिंहासन, कुर्सियाँ, जालियाँ, अटारियाँ आदि पर खुदाई करके (शिल्प करके) बनाते थे ।
  • गुजरात में संखेडा फर्निचर, लकड़ी के झूले तथा ईडर खिलौनों के लिए प्रसिद्ध है ।

निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से लिखिए:

प्रश्न 1.
नाट्य कला की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
मनोरंजन के साथ संस्कार भारतीय नाट्यकला की विशेषता रही है ।

  • नाटक का संचालन करनेवाले सूत्रधार और समझ के साथ मनोरंजन करवाते विदूषक की जोड़ी के साथ नाटक भारत की एक महत्त्वपूर्ण पहचान है ।
  • भरतमुनि द्वारा रचित ‘नाट्यशास्त्र’ ने नाट्यकला को प्रचलित किया है ।
  • नाट्यकला यह नाट्यलेखन और मंचन द्वारा रंगमंच पर दृश्य-श्राव्य और अभिनय के त्रिवेणी संगम के साथ बालवृद्धों का मनोरंजन और लोकशिक्षण करती भारत की प्राचीन कला है ।
  • इस कला में सभी कलाओं का समन्वय होने का वर्णन भरतमुनि ने किया – ‘ऐसा कोई शास्त्र नहीं, ऐसी कोई शिल्प नहीं, ऐसी कोई विद्या नहीं, ऐसा कोई कर्म नहीं, जो नाट्य कला में नहीं हो ।’
  • भरत मुनि रचित प्रथम नाट्य कथानक ‘देवासुर संग्राम’ था ।
  • संस्कृत साहित्य में महाकवि भास ने महाभारत आधारित ‘कर्णभार’, ‘ऊरूभंग’ और ‘दूतवाक्यम्’ जैसे नाटकों की विरासत हमें दी है ।
  • जबकि महाकवि कालिदास के ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’, ‘विक्रमोवर्शीयम्’ तथा ‘मालविकाग्निमित्रम्’ नाटक सबसे प्रसिद्ध रचनाएँ है ।
  • प्राचीन समय में नाट्यकला क्षेत्र में अनेक नाट्यकार हुए, जिन्होंने संस्कृत नाट्यकला को समृद्ध बनायी है ।
  • गुजराती नाट्यकला में जयशंकर तक के नाम मुख्य माने जाते है ।
  • अमृत नायक, बापुलाल नायक, प्राणसुख नायक, दिना पाठक, जशवंत ठाकर, उपेन्द्र त्रिवेदी, प्रवीण जोशी, सरिता जोशी, दीपक घीवाला आदि को महत्त्वपूर्ण नाट्यकार माने गये है ।

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प्रश्न 2.
गुजरात के अन्य प्रकार के विशिष्ट नृत्यों की संक्षिप्त में जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
(1) गोफगूंथन नृत्य: यह नृत्य ढोल के बिना संगीत के ताल, मांडवा, खंभा या वृक्ष के साथ रस्सी बांधकर उसके छोर के नीचे समूह में खड़े नृत्यकार पकड़कर (एक हाथ में छोर – दूसरे हाथ में डाँडिया) बेल के आकार में एक अंदर और एक बाहर इस तरह गोल घूमते हुए गूंथन बाँधते है और उसे छोड़ते है ।

(2) सीदियों का धमाल नृत्य: सीदी मूलत: अफ्रीका के है और वर्तमान में गिर के मध्य में जांबुर में बसे सिदियों का यह नृत्य है । मशीरा (नारियल के खोल में कोडिया भरकर उसके ऊपर कपड़ा बाँधते है ।) तालबद्ध खड़खड़ाट के साथ मोरपंख का झुण्ड और छोटे-छोटे ढोल के साथ गोलाकार घूमकर गाते हुए नृत्य करते है । हो-हो के आरोह-अवरोह के साथ गाया जाता यह नृत्य पहाड़ी और जंगल में पड़छंद उठते हो ऐसा लगता है । पशु-पक्षियों की आवाज करते हुए समूह में नृत्य करते है ।

(3) मेरायो नृत्य, पढ़ार नृत्य और कोलियों व मेर का नृत्य : बनासकांठा के वाव क्षेत्र में सरखड और झुंझाली जैसे ऊँचे घास से तोरण बांधकर, मेरायो बांधकर ढोल की आवाज के साथ तलवार के दाव-पेच जैसा नृत्य मेरायो नृत्य कहते हैं । सुरेन्द्रनगर में पढ़ार जाति के लोग पढ़ार नृत्य करते है, जो डांडिया और मंजीरा के साथ ताल और लय से होता है । शरीर पर जमीन सरसों लेकर बैठे होते है । सागर की लहरों पर हिलोरे लेती नाव जैसे दृश्य बनाते है ।

सौराष्ट्र के कोलियों का कोलीनृत्य में वे सिर पर मधासिया, टेड़ी गोल पकड़ी और उसके छेड़े में हरे रंग का पट्टा और रंगीन भेट पहनकर यह नृत्य करते है । इसी तरह सौराष्ट्र में मेर तथा भरवाड़ जाति के नृत्य भी प्रसिद्ध है ।

प्रश्न 3.
प्राचीन भारत में संगीत कला के क्षेत्र में हुए विकास की जानकारी दीजिए ।
उत्तर:
भारतीय संगीत अन्य देशों से ताल, लय और स्वरों की दृष्टि से अलग है ।

  • सामवेद को संगीत की गंगोत्री माना जाता है । सामवेद की ऋचाएँ भी संगीत के साथ तालबद्ध गानी होती है ।
  • संगीत में गायन और वादन का समावेश होता है ।
  • भारतीय संगीत में सा, रे, ग, म, प, ध, नी ये 7 स्वर होते है ।
  • भारतीय संगीत के दो प्रकार (1) लोक संगीत (2) शास्त्रीय संगीत है ।
  • भारतीय संगीत के 5 राग (1) श्री (2) दीपक (3) हिंडोल (4) मेघ और (5) भैरवी है ।
  • ये पाँचों राग भगवान शंकर के पँचमुख से उत्पन्न हुए माने जाते है ।
  • अलाउद्दीन के समय शायरी और संगीत के क्षेत्र में योगदान के कारण अमीर खुशरो को तूती-ए-हिन्द की उपमा दी गयी थी ।
  • 15वीं सदी और 16वी सदी में भक्ति आन्दोलन के समय सुरदास, कबीर, चैतन्य महाप्रभु, मीराबाई और नरसिंह मेहता ने भजन, कीर्तन द्वारा भारत में एक भक्तिमय वातावरण उत्पन्न किया था ।
  • 15वीं सदी में बाबा हरिदास के शिष्य बैजु बावरा तथा गुजरात में सगी और जुड़वा बहनों ताना और रीरी ने महत्त्वपूर्ण योगदान दिया था ।

संगीत की पुस्तकें:

(1) संगीत मकरंद: इस ग्रन्थ की रचना पं. नारद ने ई.स. 900 के अरसे में की थी ।
* इस ग्रन्थ में 19 प्रकार की वीणा और 101 प्रकार के ताल का वर्णन है ।

(2) संगीत रत्नाकर: इस ग्रन्थ की रचना पं. सारंगदेव ने की थी ।
* पं. विष्णुनारायण भातखंड ने ‘संगीत रत्नाकर’ को भारतीय संगीत का सबसे अधिक प्रमाणिक ग्रन्थ माना है ।
* संगीत के अंगों को समझने के लिए यह बेजोड़ माना जाता है ।

(3) संगीत पारिजात: इस ग्रन्थ की रचना सन् 1665 में पंडित अहोबल ने की थी ।
* उन्होंने प्रत्येक राग अन्य राग से अलग होने तथा उसका स्वतंत्र अस्तित्व तथा विशेषता होने को समझाया है ।
* इसमें 29 प्रकार के स्वरों का वर्णन है ।

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निम्नलिखित विधानों के कारण स्पष्ट कीजिए:

प्रश्न 1.
विविधता विश्व में भारत की अमीट छाप है ।
उत्तर:
भारत की सर्वव्यापक और सबको समाविष्ट करनेवाली है ।

  • प्राचीन काल से वर्तमान काल तक विविध जातियों का आगमन और परिवर्तन के अनुसार हस्तकला, गृह कारीगरों, चित्र तथा नृत्य कला सहित विविध ललितकलाओं का समावेश होता है । ये भारत की वैविध्य विरासत का दर्शन कराते है और विश्व में भारत की अमीट छाप छोड़ते है ।

प्रश्न 2.
हस्तकला भारत की एक महत्त्वपूर्ण पहचान है ।
उत्तर:
भारतीय सांस्कृतिक विरासत का सौंदर्य भारतीय कारीगरों का हुन्नर परंपरा में समाया हुआ है ।

  • भारत के सामूहिक जीवन को उन्होंने, उनकी कला-कारीगरी और हुन्नर उद्योग द्वारा कुशलता विकसीत की है ।
  • भरत गूंथन काष्ठकला, मिट्टी कला, धातुकाम, चित्रकला, चर्म उद्योग, मीना कारीगरी, नक्काशीकार्य, अकीक और हीरे से संलग्न कौशल्यपूर्ण कारीगरी, शिल्प-स्थापत्य, हस्तकला से जुड़े कार्यों ने भारत की एक महत्त्वपूर्ण पहचान दी है ।

निम्नलिखित विषयों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए:

प्रश्न 1.
रास नृत्य:
उत्तर:
रास अर्थात् गोलाकार घूमकर नृत्य के साथ घूमना ।

  • हमारे यहाँ नरसिंह मेहता ने रासलीला बतायी थी ऐसी कथा है ।
  • गुजरात में अधिकांशतः नवरात्रि तथा जन्माष्टमी जैसे त्यौहारों में रास खेला जाता है ।
  • रास का एक प्रकार दांडिया रास है परंतु गागर और हाँडी लेकर भी रास किया जाता है ।
  • वैष्णव संप्रदाय का प्रभाव बढ़ने से रास नृत्य का प्रभाव अधिक बढ़ा है ।
  • रास खेलने में स्त्रियाँ भरत परे हुए चणिया-चोली और पुरुष केडिया-धोती की परंपरागत पोशाक है ।

प्रश्न 2.
मणिपुरी नृत्य:
उत्तर:
मणिपुरी प्रजा प्रत्येक उत्सव पर नृत्य करती है ।

  • मणिपुरी नृत्य शैली मुख्यत: श्रीकृष्ण की बाललीला और रासलीला पर आधारित है ।
  • मणिपुरी नृत्य के लास्य और तांडव ये दो प्रकार है ।
  • इस नृत्य के समय रेशम का ब्लाऊज पहनकर कमर पर पट्टा बाँधा जाता है तथा नीचे घेरदार हरे रंग की चणिया ‘कुमान’ पहनते है ।
  • गुरु आमोबीसिंग, आतोम्बोसिंग, गुरु विपिन सिन्हा, नयना झवेरी, निर्मल मेहता आदि ने इस नृत्य को प्रसिद्ध किया है ।

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प्रश्न 3.
धातुकला का प्राचीन काल में विकास:
उत्तर:
पाषाणयुग के बाद धातुकला का विकास हुआ था ।

  • लोथल के कारीगर धातुओं से बने दांतरे, करवत, आरी, सूई जैसी काँसे और तांबे के औजार बनाते थे ।
  • इसके उपरांत धातु के औजार, बर्तन, मूर्तियाँ और पात्र बनाते थे ।
  • युद्धों के लिए शस्त्र भी धातु से बनते थे ।
  • सोने-चाँदी जैसे धातुओं के उपयोग गहनों में होता था । ताँबा, पीतल, काँसे जैसी धातुओं का उपयोग बर्तन और मूर्तियाँ बनाने में तथा लोहे का उपयोग औजारों और हथियारों के निर्माण में होता था ।

प्रश्न 4.
भरतनाट्यम्:
उत्तर:
भरतनाट्यम् का उदभव स्थान तमिलनाडु का तांजोर जिला है ।

  • भरत मुनि द्वारा रचित ‘नाट्यशास्त्र’ और नंदिकेश्वर द्वारा रचित ‘अभिनव दर्पण’ भारत नाट्यम् पर आधारित ग्रन्थ है ।
  • मृणालिनी साराभाई, गोपीकृष्ण, अभिनेत्री हेमामालिनी, वैजयन्तिमाला मुख्य नृत्यकार है ।

प्रश्न 5.
अकीक काम:
उत्तर:
नदी घाटी प्रदेशों में पाया जानेवाला एक कीमती पत्थर अकीक होता है । उसमें अकीक, चकमक और अर्द्धपारदर्शक सुन्दर लाल पत्थर मुख्य है ।

  • विशेषकर सिलिकायुक्त – मिश्रित भूरे और सफेद रंग का पत्थर अकीक होता है ।
  • गुजरात में अहमदाबाद, सुरत, खंभात और राणपुर क्षेत्रों से अकीक प्राप्त होता है ।
  • अकीक का उपयोग अलंकारों में जड़ने के लिए खंभात में होता है ।
  • खंभात के कारीगर अकीक को विभिन्न जेवरातों में जड़नेलायक बनाते है । इससे माला और मणके भी बनते है ।

प्रश्न 6.
गुजरात में भरत-गूंथन कला:
उत्तर:
कपड़े पर भरत-गूंथन कार्य गुजरात में कच्छ, सौराष्ट्र आदि में स्त्रियों का गृह व्यवसाय है ।

  • चंदरवा, शान तोरण, चाकला, ओछाड, तकिया, पारणा के उपरांत केडिया नामक वस्त्रों पर भरत-गूंथन की कला की परंपरा आज भी प्रसिद्ध है।
  • भरत-गूंथन से सज्जे गादले, रजाई पर भौमितिक और विविध आकृति प्रधान कृतियों के साथ भी पाया जाता है ।
  • कच्छ के बन्नी क्षेत्र में ‘जत’ जाति भरत कला के लिए विशेष प्रसिद्ध है ।

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